Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 37, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 37, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
एवं वर्षसहस्राणि पीनात्माऽतिष्ठदेकदृक् ।
शान्त एवासुरपुरे मार्तण्ड इव चोपले ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार पत्थर
पर गढ़े हुए सूर्य के समान निश्चल ब्रह्मस्वरूप वह शान्त असुरपुर में हजार वर्ष तक बाह्य दृष्टि शून्य
होकर स्थित रहा