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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 36, Verse 74

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 36, verse 74 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 74

संस्कृत श्लोक

इमां सुखादिकां लक्ष्मीं विवेकिजनचेतसि । स्थितः सन्नेव गृह्णासि न जहासि समस्थितिम् ॥ ७४ ॥

हिन्दी अर्थ

उक्त रीति से अत्यन्त दुर्घट भी सुख-दुःखादि संपत्ति को सुख-दुःख आदि की दुर्घटता जाननेवाले विवेकी जनों के हृदय में स्थित हुए आप ग्रहण करते हैं, किन्तु सम स्थिति का त्याग नहीं करते, यही अविवेकियों से विवेकियो मेँ अन्तर हे