Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, Verse 45
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, verse 45 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
पुण्यतामलमायातः प्रफुल्ल इव राजते ।
प्रशान्तमोहदारिद्र्यो दुराशादोषसंक्षये ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
दुराशारूपी दोष का नाश
होने पर विवेकरूपी धन समृद्धि को प्राप्त कर मेरी मोहरूपी दरिद्रता नष्ट हो चुकी है, अतएव मेँ
परमेश्वररूप से स्थित हूँ