Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
विमलमलिकलापकोमलाङ्गं सितदलपङ्कजकुड्मलाभशङ्खम् ।
श्रुतिरणितविरञ्चिचञ्चरीकं स्वहृदयपद्मदलाश्रयं प्रपद्ये ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
जिनका शरीर भरो की राशि के समान कोमल हे, जिनका शुभ्र शंख सफेद कमल के कुण्डल के समान
सुशोभित होता है, श्रुति ही जिनका गुंजन है ऐसे ब्रह्माजी जिनके नाभि कमल के भ्रमर हैं एवं जो अपने
भक्तों के हृदयकमल मेँ निवास करते हैं, ऐसे भगवान् की मैं शरण लेता हूँ