Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
सबाह्याभ्यन्तरं कष्टं समग्रालोकहारिणः ।
रिपवः प्रौढिमायाता अपूर्वतिमिरभ्रमाः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
बड़ा खेद हे, बाहरी और भीतरी सब सम्पत्तिरूपी
प्रकाशो को हरनेवाले अद्भुत अन्धकार के तुल्य हमारे शत्रु उन्नति के शिखर पर पहुँच चुके हैं