Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, Verses 32–34
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, verses 32–34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 32,34
संस्कृत श्लोक
अभ्यस्ता बहवस्तेन मिथः प्रेरितपर्वताः ।
भीमाः समरसंरम्भाः सममस्मत्पितामहः ॥ ३२ ॥
तासु तास्वतिघोरासु विततास्वतिराजिषु ।
यो न भीत इदानीं स भयमेष्यति का कथा ॥ ३३ ॥
उपायमेकमेवेमं हरेराक्रमणे स्फुटम् ।
मन्ये तद्व्यतिरेकेण विद्यते न प्रतिक्रिया ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
उन्होने हमारे बाप-दादों के साथ बहुत से भयंकर युद्ध कौशलों का
अभ्यास किया है जिनमें परस्पर पर्वत फेंके गये थे उन अतिभीषण और विशाल शत्रुपंक्तियों में जो
भयभीत नहीं हुआ था, वह इस समय भयभीत होगा, इसमें तो कहना ही क्या है 2