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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verses 54–55

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, verses 54–55 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 54 ,55

संस्कृत श्लोक

येषु येषु प्रदेशेषु मनो मज्जति बालवत् । तेभ्यस्तेभ्यः समाहृत्य तद्धि तत्त्वे नियोजयेत् ॥ ५४ ॥ एवमभ्यागताभ्यासं मनोमत्तमतंगजम् । निबध्य सर्वभावेन परं श्रेयोऽधिगम्यते ॥ ५५ ॥

हिन्दी अर्थ

बालक की नाई जिन-जिन प्रदेशों में मन निमग्न होता है उन-उन प्रदेशों से लौटाकर मन को अधिष्ठान चिन्मात्र में लगायें भगवान ने भी कहा है : यतो यतो निश्चरति मनश्वंचलमस्थिरम्‌। ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत ॥ इस प्रकार अभ्यास को प्राप्त हुए मनरूपी मत्त हाथी को सब प्रयत्नो से बाँधकर परम कल्याण प्राप्त होता है