Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verses 24–26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, verses 24–26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 24,25
संस्कृत श्लोक
इत्यसौ ववृधे तस्मिन्राज्ये सकलशासने ।
यज्ञं प्रति बभूवाथ मतिरस्य कदाचन ॥ २४ ॥
तर्पिताशेषभुवनं देवर्षिगणपूजितम् ।
सह शुक्रादिभिर्मुख्यैः स चकार महामखम् ॥ २५ ॥
बलिर्भोगभरस्यार्थी नेति निर्णीय माधवः ।
बलेरीहितसिद्ध्यर्थं सिद्धिदस्तन्मखं ययौ ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा बलि
देवता, असुर आदि सब पर शासनरूप राज्य में राज्यांग आदि की अभिवृद्धि को प्राप्त हुआ। तदनन्तर
कभी उसकी अश्वमेघ यज्ञ करने की इच्छा हुई । उसने शुक्राचार्य आदि प्रधान पुरुषों के साथ अश्वमेघ
नामक महायज्ञ किया जिसमें तीनों भुवनों के लोग तृप्त किये गये थे और सब देवता तथा ऋषि पूजे गये
थे