Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
न मे वाञ्छा परे तत्त्वे न मे वाञ्छा जगत्स्थितौ ।
न मे ध्यानदशाकार्यं न कार्यं विभवेन मे ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
न परमतत्त्व की मुझे अभिलाषा है और न जगत की स्थिति की मुझे वांछा है। न
तो ध्यान दशा से मेरा कोई प्रयोजन है और न धन-सम्पत्ति से ही मेरा कोई कार्य है