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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 28, Verse 16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 28, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

श्रान्तो विश्राममायातः क्षीणचित्तभवभ्रमः । शान्तसंसारनीहारो वाचनीयो न दानवाः ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

चिरकाल से थका हुआ-सा यह चित्त भ्रान्तिरहित होकर विश्राम को प्राप्त हो रहा है। इसका संसाररूपी कुहरा शान्त हो गया हे । इससे आप लोग भाषण न कीजिये