Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 28, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 28, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
अयं तदेवमेवेह तिष्ठन्दानवसत्तमाः ।
स्वात्मनि स्थितिमाप्नोतु पदं पश्यत्वनामयम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे दानवश्रेष्ठ, इसलिए यह ऐसे ही समाधि में स्थित
होकर निरतिशयआनन्दरूप आत्मा में चिरस्थिति को प्राप्त हो ओर निर्विकार पद का साक्षात्कार
करे