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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, Verse 70

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, verse 70 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 70

संस्कृत श्लोक

न पुनः कल्पनापङ्के दुःखाय निपतिष्यसि । स्थितापि नास्था ते शुद्ध नमस्तेऽस्तु सदाशिव ॥ ७० ॥

हिन्दी अर्थ

हे शुद्ध तुम्हारी आस्था भोगों में स्थित भी नहीं हे, जिससे कि तुम्हें अन्य काल की प्रतीक्षा करनी पड़े अतएव तुम सदाशिव ही हो । अतः ब्रह्मभूत तुमको नमस्कार है (यहाँ पर पुत्र दृष्टि से नमस्कार अनुचित है तथापि ब्रह्म दृष्टि से उचित है, यह समझना चाहिये)