Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, Verse 67
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, verse 67 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 67
संस्कृत श्लोक
प्रवर्तते समासङ्गात्तेषां भोगविगर्हणा ।
ततो विचारस्तदनु ज्ञानं शास्त्रार्थसंग्रहः ॥ ६७ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर विचार होता है, विचार के बाद
विचाररहित वाक्यार्थ का ज्ञान होता है । उसके बाद गति सामान्य न्याय के आलोचन से सब श्रुतियों के
अद्वितीय ब्रह्म में तात्पर्य का निर्णय होता हे। तदनन्तर क्रम से परमपद प्राप्त होता हे