Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, Verse 51
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
प्रज्ञया परया ऋज्व्या भोगानामीश्वरस्य च ।
सममेवाथ देहस्य रूपमाश्ववलोकयेत् ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसमें भेद से विषमतारूप कुटिलता नहीं रह गई, ऐसी सरल उत्कृष्ट
प्रज्ञा से वह इन्द्रिय, विषय और उनकी वृत्तियों के, उनके स्वामी जीव के और भोगायतन देह के समानरूप
से अधिष्ठानभूत ब्रह्म को शीघ्र देखे, जो सच्चिदानन्द अद्वितीय एकरस है