Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, Verses 16–18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, verses 16–18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
बलिरुवाच ।
या युक्तिर्भगवंस्तस्य चित्तस्याक्रमणे स्फुटम् ।
तां मे कथय तत्तावद्यथा जेष्यामि दारुणम् ॥ १६ ॥
विरोचन उवाच ।
विषयान्प्रति भोः पुत्र सर्वानेव हि सर्वथा ।
अनास्था परमा ह्येषा सा युक्तिर्मनसो जये ॥ १७ ॥
एषैव परमा युक्तिरनयैव महामदः ।
स्वमनोमत्तमातङ्गो द्रागित्येवावदम्यते ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
बलि ने कहा : हे भगवन्, उस चित्त की विजय में जो युक्ति हो, उसे आप स्पष्ट रूप से कहिये,
जिससे कि मैं उस दारुण मन को जीरतूगा