Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 21, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 21, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
यो यया वर्तते वृत्त्या स तयैव विना क्षयी ।
अतश्चित्तोपशान्त्यर्थं तद्वृत्तिं प्रक्षयं नय ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
जाडा ओर उष्णता का नाश होने पर अग्नि के उपशम के समान वृत्ति का नाश होने परमन का
उपशम सिद्ध होता है, ऐसा कहते है ।
जो जिस वृत्ति से जीवित रहता है, उस वृत्ति के सर्वथा निरोध से वह अपक्षय क्रम से नष्ट हो जाता
है । इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी, आप चित्त के उपशम के लिए चित्तवृत्ति का नाश कीजिये