Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 2, Verses 38–39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 2, verses 38–39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 38,39
संस्कृत श्लोक
वसिष्ठमुनिना प्रोक्ता विरक्ताः प्रथमं गिरः ।
ततो मुमुक्षोराचार उत्पत्तीनां क्रमस्ततः ॥ ३८ ॥
ततः स्थितिप्रकरणं समं दृष्टान्तसुन्दरम् ।
विज्ञानगर्भसुलभं यथावत्स्मर हे मते ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार प्रार्थना द्वारा सावधान की गई बुद्धि को वैराग्य-प्रकरण आदि चार प्रकरणों के अर्थ के
स्मरण में क्रमश: नियुक्त करते हैं।
हे मते, श्रीवसिष्ठ मुनि द्वारा मेरे मुख से कहलाई गई और स्वयं कही गई वैराग्यवाणियों का,
तदनन्तर मुमुक्षुओं के आचार का, तदनन्तर उत्पत्तियों के क्रम का तदनन्तर दृष्टान्तं से सुन्दर ओर
ज्ञानपूर्ण उपाख्यानों से सुबोध इस स्थिति -प्रकरण का तुम भली भाँति स्मरण करो