Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 2, Verse 37
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 2, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
त्वां पादपतितः प्रीत्या याचे सति सुते मते ।
तेन भव्ये भवोच्छेदभूतये सुस्थिरा भव ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे साध्वि, हे
पुत्रि, (=) हे सन्मते, हे भव्ये, तुम्हारे पैर पड़कर प्रेम से मैं प्रार्थना करता हूँ। मेरी प्रार्थना से संसार के
उच्छेद से उपलक्षित पूर्णता की प्राप्ति के लिए तुम खूब सावधान होओ