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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verses 55–56

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, verses 55–56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 55,56

संस्कृत श्लोक

ये ये नाम महाभागा बहवो बान्धवास्तथा । विनष्टा एव दृश्यन्ते ते ते कतिपयैर्दिनैः ॥ ५५ ॥ परतात्मीयतान्यत्वत्वत्वमत्त्वादिभावना । नेह सत्या महाबाहो द्विचन्द्रादिदृशो यथा ॥ ५६ ॥

हिन्दी अर्थ

जो-जो महाभाम्यशाली बहुत-से बान्धव हैं, वे सब कुछ ही दिनों में नष्ट हुए ही देखने में आते हैँ । हे महाबाहो, परता, आत्मीयता, अन्यता, त्वत्ता, मत्ता इत्यादि भावनाएँ द्विचन्द्रदर्शन के समान सत्य नहीं है