Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
भ्रान्तिमात्रमिदं मोहाज्जगद्राघव दृश्यते ।
जनितप्रत्ययं स्फारं जलं तीव्रातपे यथा ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, जैसे तेज धूप में जल की प्रतीति करानेवाला प्रचुर मृगजल भ्रमवश दिखाई
देता है, वैसे ही अज्ञान से भ्रान्तिमात्र यह जगत दिखाई देता है