Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
आशापाशशतोन्मुक्तः समः सर्वासु वृत्तिषु ।
बहिः प्रकृतिकार्यस्थो लोके विहर राघव ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, सैकड़ों आशारूपी पाशों से उन्मुक्त, सब वृत्तियों में सम, बाहर तत्तत वर्णाश्रम स्वभाव
के उचित कार्यो में अथवा प्रजाओं के हितकर कार्यो में संलग्न आप लोक में विहार कीजिये