Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
विहरन्नपि संसारे जीवन्मुक्तमना मुनिः ।
आदिमध्यान्तविरसा विहसेज्जागतीर्गतीः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
जीवन्मुक्त मनवाला मुनि इस संसार में विचरण करते हुए भी पहले जन्मादि दुःखों से,
बीच में आध्यात्मिक आदि दुःखों से और अन्त में मृत्यु आदि दुःखों से विरस जगत की गतियो को “ये
परिहास के योग्य हैं", यों तुच्छ समझ कर देखे