Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 17, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 17, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
द्वैताद्वैतसमुद्भेदैर्जगन्निर्माणलीलया ।
परमात्ममयी शक्तिरद्वैतैव विजृम्भते ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
तो जल-समुद्र आविरूप जगत में भेदाभेद प्रतीति कैसे होती है ? इस पर कहते हैं ।
परमात्ममयी अद्वैत शक्ति ही द्वित ओर अद्वैतभेद से जगन्निर्माण लीला द्वारा अज्ञं के लिए विस्तार
को प्राप्त होती है