Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 17, Verses 16–17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 17, verses 16–17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 16,17
संस्कृत श्लोक
जगज्जालपदार्थात्मा सर्वमेवाहमक्षयः ।
तृतीयो निश्चयश्चेत्थं मोक्षायैव रघूद्वह ॥ १६ ॥
अहं जगद्वा सकलं शून्यं व्योमसमं सदा ।
एवमेष चतुर्थोऽन्यो निश्चयो मोक्षसिद्धये ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे रघुवर, जगत के सब पदार्थो का स्वरूपभूत अविनाशी मैं ही सब कुछ हूँ इस प्रकार का तीसरा निश्चय
भी मोक्ष का ही कारण है। मैं अथवा यह जगत सब आकाश के तुल्य सब शून्य ही है, इस प्रकार का यह
चौथा निश्चय भी मोक्षसिद्धि के लिए होता है