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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 16, Verse 23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 16, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

श्रीवाल्मीकिरुवाच । इत्युक्तवत्यथ मुनौ दिवसो जगाम सायंतनाय विधयेऽस्तमिनो जगाम । स्नातुं सभा कृतनमस्करणा जगाम श्यामाक्षये रविकरैश्च सहाजगाम ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : मुनिजी के ऐसा कहने पर दिन बीत गया । सूर्य अस्त हो गया । मुनियों की सभा महामुनि को प्रणाम कर सायंकाल के कृत्य के लिए स्नान करने चली गई । रात्रि बीतने पर सूर्य की किरणों के साथ फिर मुनियों की उभा उपस्थित हो गई