Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 16, Verses 15–16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 16, verses 15–16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 15,16
संस्कृत श्लोक
द्वावेव राघव त्यागौ समौ मुक्तपदे स्थितौ ।
द्वावेतौ ब्रह्मतां यातौ द्वावेव विगतज्वरौ ॥ १५ ॥
युक्तायुक्तमती स्वासे केवलं विमलेऽनघ ।
एकः स्थितः स्फुरद्देहः शान्तदेहः स्थितोऽपरः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, ये पूर्वोक्त दोनों ही त्याग समान हैं, दोनों मुक्तपद में स्थित हैं | ये दोनों ही
ब्रह्मता को प्राप्त हैं और दोनों सन्तापरहित हँ । हे अनघ युक्तमति (समाधि मेँ आरूढ), अयुक्तमति
(व्युत्थान व्यवहारवाला) - ये दोनों ही अविद्या मलरहित ब्रह्म में ही केवल स्थित हँ । उनमें से एक
यानी व्युत्थित पुरुष चंचल शरीरवाला स्थित रहता है ओर दूसरा शान्त देह रहता है