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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 15, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 15, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

क्षणमुल्लासमायाति क्षणमायाति शून्यताम् । जडा विदलयत्याशु तृष्णाप्रावृट्तरङ्गिणी ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

जड़ तृष्णा जलमय वर्षा ऋतु की नदी के समान क्षणभर में वृद्धि को प्राप्त होती है, क्षणभर में रिक्त हो जाती है ओर टीला, कटि, जंगल आदि में प्रवेश करा कर पुरुष को काटती है