Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 15, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 15, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
तस्माद्राघव तृष्णां त्वं त्यज संकल्पवर्जनात् ।
मनस्त्वकल्पनं नास्ति निर्णीतमिति युक्तितः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी, संकल्प त्याग से आप तृष्णा का त्याग कीजिये । संकल्पहीन मन नहीं हे
अर्थात् संकल्प के अभाव में मन नहीं रह सकता, ऐसा युक्तियों से निर्णय किया गया हे । मन ही जव
नहीं रहेगा, तब तृष्णा कहाँ से होगी ? यह भाव हे