Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 15, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 15, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
सर्वैव लोकयात्रेयं प्रोता तृष्णावरत्रया ।
रज्जुबन्धाद्विमुच्यन्ते तृष्णाबन्धान्न केचन ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
यह सारी लोक-यात्रा तृष्णारूपी रज्जु
से बँधी हुई है, रज्जुबन्धन से तो लोग मुक्त हो सकते हैं, परन्तु तृष्णारूपी बन्धन से कोई मुक्त
नहीं हो सकते