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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verses 92–93

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verses 92–93 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 92,93

संस्कृत श्लोक

चित्ततैषा चितो मिथ्या कल्पिता बालयक्षवत् । अखण्डमण्डलाकारस्पन्दरूपा चिदेव यत् ॥ ९२ ॥ सैषा चित्ता तदन्येन केन संबाध्यते किल । अखण्डशक्तेरिन्द्रस्य केन स्यात्सह संगरः ॥ ९३ ॥

हिन्दी अर्थ

चित्त की यह चित्तता बाल के यक्ष के समान मिथ्या कल्पित है, क्योकि जिसमें अखण्डमण्डलाकार रूप स्पन्द नहीं है, ऐसा चित्‌ ही परमार्थरूप है। उक्त अखण्डपूर्णरूप यह चित्तस्वभावता चित्‌ से अन्य किससे खण्डित होगी ? भला अखण्डशक्तिवाले इन्द्र का युद्ध किसके साथ हो सकता है ?