Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
प्रसन्ने सर्वगे देवे देवेशे परमात्मनि ।
स्वयमालोकिते सर्वाः क्षीयन्ते दुःखदृष्टयः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रसन्न, सर्वव्यापक, इन्द्रियो को वश में करनेवाले, स्वयंज्योति परमात्मा के
अपने-आप साक्षात्कृत होने पर सब दुःख दृष्टियाँ नष्ट हो जाती हैं