Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
जनकस्येव सद्बुद्धेः स्वयमेव विलोकिनः ।
विकासमेत्ययं देही देवः प्रातरिवाम्बुजम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे प्रातःकाल में कमल विकास को प्राप्त होता है, वैसे ही जनक के तुल्य सद्बुद्धि ओर स्वयं
ही आत्मसाक्षात्कार करनेवाले पुरुष की देह के अन्दर हृदय में स्थित स्वयंज्योति परमात्मा विकास को
प्राप्त होता हे