Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 106
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verse 106 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 106
संस्कृत श्लोक
अहो नु खलु चित्रेयं मायामयविधायिनी ।
चेतसाप्यतिलोलेन लोकोऽयमभिभूयते ॥ १०६ ॥
हिन्दी अर्थ
महामायावी-रूप से प्रसिद्ध
मयासुर का भी निर्माण करनेवाली यह माया अत्यन्त अद्भूत है, जिससे एक अत्यन्त चंचल चित्त से भी
ये लोग अभिभूत हो रहे हे