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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verses 100–101

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verses 100–101 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 100

संस्कृत श्लोक

जडत्वान्निःस्वरूपत्वात्सर्वदैव मृतं मनः । मृतेन मार्यते लोकश्चित्रेयं मौर्ख्यचक्रिका ॥ १०० ॥ यस्य नात्मा न देहोऽस्ति नाधारो नापि चाकृतिः । तेनेदं भक्ष्यते सर्वं चित्रेयं मौर्ख्यवागुरा ॥ १०१ ॥

हिन्दी अर्थ

जड़ होने से ओर स्वरूपहीन होने से मन सदा ही मरा है, मरे हुए मन से लोग मारे जाते हैं, यह चक्रवात घूमती हुई मूर्खता की परम्परा बड़ी ही विचित्र है