Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, Verses 5–6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, verses 5–6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 5,6
संस्कृत श्लोक
स्वविवेकानुसंधानादिति तस्य महीपतेः ।
सम्यग्ज्ञानमनन्ताभमलं विमलतां ययौ ॥ ५ ॥
अनामृष्टविकल्पांशुश्चिदात्मा विगतामयः ।
उदियाय हृदाकाशे तस्य व्योम्नीव भास्करः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा जनक का अपरिच्छन्न ब्रह्माकार सम्यक् ज्ञान अत्यन्त निर्मल हो गया । जैसे आकाश में सूर्य
उदित होते हैं, वैसे ही उनके हृदयाकाश में चिदात्मा, उदित हो गया जिसके प्रकाश विक्षेपो से सम्पादित
रंजनाभेदों से रहित हैं और जो दुःखों से शून्य है