Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
य एव यत्नः क्रियते बाह्यार्थोपार्जने जनैः ।
स एव यत्नः कर्तव्यः पूर्वं प्रज्ञाविवर्धने ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
बाह्य पदार्थों के अर्जन में लोग जैसे उद्योग करते हैं, प्रज्ञा की अभिवृद्धि के लिए पहले वैसा ही
उद्योग करना चाहिए, उससे अधिक परिश्रम की आवश्यकता नहीं है, यह भाव है