Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
स्वविचारवशेनैव तेन तामरसेक्षण ।
प्राप्तं प्राप्यमशेषेण राम नेतरयेच्छया ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे कमलनयन
श्रीरामचन्द्रजी, एकमात्र अपने विचार से ही राजा जनक को प्राप्तव्य परम ब्रह्मरूप वस्तु निःशेषरूप से
प्राप्त हुई यानी विस्मृत गले के सुवर्णहार की तरह ज्ञानमात्र से मिली, न कि अन्य इच्छा से