Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 11, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 11, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
संपाद्य तदहःकार्यमार्यावर्जनपूर्वकम् ।
अनयच्छर्वरीमेकस्तयैव ध्यानलीलया ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
देवता, ब्राह्मण आदि पूजनीय लोगों का पूजा, दान आदि द्वारा
सम्मान कर उस दिन का कार्य पूरा करके उसी ध्यानलीला से उन्होने अकेले रात बिताई