Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 10, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 10, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
तूष्णीमथ क्षणं स्थित्वा जनको जनजीवितम् ।
पुनः संचिन्तयामास मनसा शमशालिना ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर राजा
जनक ने क्षणमात्र चुप रह कर पुनः शमयुक्तमन से प्राणियों के जीवन में हेतुभूत तत्व का चिन्तन
किया