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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, Verse 27

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

मद्रराजतनुं चारुं तपोवासनया सह । तत्याज तेन जातोऽसौ तपस्वी तापसात्मजः ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

तप की वासना के यानी वानप्रस्थ के धर्मचिन्तन के साथ उसने वह सुन्दर मद्रराज का शरीर छोड़ा था, इस कारण वह तपस्वी का लडका और स्वयं तपस्वी हुआ