Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
आसीद्विलीयमानाङ्गो ज्योत्स्नामिन्दुमणिर्यथा ।
विलीयमानसर्वाङ्गस्तामवैक्षत कामिनीम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
पसीने से सराबोर शरीर वाले शुक्राचार्यजी ने उस सुन्दर
अप्सरा को ऐसे देखा, जैसे कि चन्द्रकान्तमणि आकाश में शोभित होनेवाली शीतल चाँदनी को देखती
है