Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
सापि तं भार्गवं राम दृष्ट्वा परवशाभवत् ।
तामालोक्य लसल्लोलविलासवलिताकृतिम् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, वह अप्सरा भी श्री शुक्राचार्य को देखकर मोहित हो गई ओर शुक्राचार्य भी
स्फुरित हो रहे चंचल हावभावरूपी विलासों से सराबोर आकारवाली उसको देखकर मोहित हो गए।
जैसे चाँदनी को देखकर चन्द्रकान्तमणि के सब अवयव गलने लगते हैं वैसे ही उसे देखकर मारे पसीने
के शुक्राचार्य के सब अवयव तर हो गये