Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
एताः प्रसृतमन्दारमञ्जरीपुञ्जपिञ्जराः ।
दोलालोलाप्सरःश्रेण्यः शक्रोपवनवीथयः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
ये इन्द्र के
नन्दनवन की वीथियाँ हैं, गिरी हुई मन्दारमंजरी के गुच्छं से ये पीली हो गई हैं और अनेक अप्सराएँ
इनमें झूला झूल रहीं हैं