Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 44
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, verse 44 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
पुनस्तत्पदमालम्ब्य परमापद्विनिर्गतः ।
स्वस्थस्तिष्ठति शान्तात्मा निर्मन्दर इवार्णवः ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
फिर
पूर्वोक्त सप्तम भूमिकारूप परमपद को पाकर सृष्टि विक्षेपरूप परम आपत्तियों से छुटकारा पाये हुए
ब्रह्मा मन्थनदण्डरूप मन्दराचल से छुटकारा पाये हुए सागर के समान स्वस्थ और शान्तात्मा होकर
स्थित होते हैं