Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verses 42–43
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, verses 42–43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 42,43
संस्कृत श्लोक
ततः स करुणाक्रान्तमना भूतविभूतये ।
करोतीह महार्थानि शास्त्राणि विविधानि च ॥ ४२ ॥
अध्यात्मज्ञानगर्भाणि वेदवेदाङ्गसंग्रहम् ।
पुराणादीनि चान्यानि मुक्तये सर्वदेहिनाम् ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
फिर दया से आक्रान्त चित्तवाले वे प्राणियों के कल्याण के लिए
अध्यात्मज्ञान से भरे हुए गम्भीर अर्थवाले बहुत से शास्त्रों की रचना करते हैं। वेद, वेदांग के संग्रह की
और पुराण आदि अन्यान्यशास्त्रों की भी सब जीवों की मुक्ति के लिए रचना करते हैं