Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
संकल्पजालरूपस्य मनसा कल्पिताकृतेः ।
अकरोत्तस्य संकल्पलक्ष्मीः पदमथोत्तरे ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
उत्थानरूप जाग्रत
की कल्पना के बाद सकल संकल्पात्मक मनों के समष्टिरूप एवं अपने ही मन से चतुर्मुख आकृति की
कल्पना किये हुए ब्रह्मा के संकल्प ने आगे की सृष्टि में उद्यम किया