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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, Verse 4

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

नेदमस्ति जगद्राम तव नास्ति महामते । केवलं स्वच्छमेवेत्थमाततं मितमीदृशम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, यह जड जगत असत्‌ है, ऐसा यदि आप मानते है, तो आपका बन्धन ही नहीं है | केवल स्वच्छ आत्मतत्त्व ही इस प्रकार चारों ओर विस्तृत ज्ञात हो गया, अतएव अन्य में रचना का (तादात्म्य संसागध्यास का) अवकाश ही नहीं रहा