Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
सर्वेच्छारहिते भानौ यथा व्योमनि तिष्ठति ।
जायते व्यवहारश्च सति देवे तथा क्रिया ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सब प्रकार की इच्छा
से रहित सूर्य के आकाश में रहने पर सब लौकिक व्यवहार होते हैं, वैसे ही परमात्मा की सत्ता से
सब व्यवहार होते हैं