Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
अकस्मादागतो जन्तुः सौहार्दस्य न भाजनम् ।
भ्रमोद्भूतं जगज्जालमास्थायास्तन्न भाजनम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे अकस्मात कहीं से आया हुआ अपरिचित प्राणी
मैत्री का पात्र नहीं होता, वैसे ही भ्रम से उत्पन्न हुआ वह जगज्जाल भी आस्था का भाजन नहीं है