Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
कुर्वन्न किंचित्कुरुते दिवाकार्यमिवांशुमान् ।
गच्छन्न गच्छति स्वस्थः स्वास्पदस्थो रविर्यथा ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सूर्य सब
प्राणियों के दिवस कृत्य का निर्वाह करता हुआ भी कुछ नहीं करता वैसे ही परमात्मा भी सबका निर्वाह
करता हुआ भी कुछ नहीं करता जैसे सूर्य अपने पद में स्थित होकर चलता हुआ भी नहीं चलता वैसे
ही अपने स्वरूप में स्थिर आत्मा चलता हुआ भी नहीं चलता